Friday, March 9, 2018

Come On

i breathe your name
inked you on me
now if you'll leave
it'll be the death of me

look I've washed myself
all nice and clean
the feast all served
come on,.have a slice of me

i'm tight down there
i know that's how you like it
now you won't crave anything
wait till you take the lid off me

i''ll change positions
you can ride me wild
i have watched those videos
well rehearsed my lines

no darling you won't be bored
i'll pull out new tricks each time
my portions curled inside you
fulfilling your appetites

i have stabbed my passion
swallowed my esteem
my legs pried open
come  on,fuck me

you'd compliment me
even get me a rose
but your in habit
you'll visit your darling whores

well,at least you didn't let  me down
though it was cold and dry
you won;t hang onto me
still it was worth a try








Monday, February 26, 2018

Darr sa Lagta hai

इन खिड़कियों को अब खोलने से डर लगता है
आसमान को नापने से डर लगता है
बुनने  लगता हु सपनो में तो खोने से डर लगता है
कल्पनाये पिरोने लगता हु जब ,तो खुद को ढूंढने से डर लगता है
चैन से सोना  हूँ पर सोने से डर लगता है
आवाज़ देकर चौंका देती है ये भोज से लद्दी किताबे मुझे
अब तो किताबे खोलने से भी डर सा लगता है
मै कूदकर ,दौड़कर चढ़ जाऊँगा ये सीढ़ियां
पर क्या करूँ नन्हे से है ये कदम ,ऊंचाइयों से डर लगता है



Monday, February 19, 2018

Dosti

गर शुक्रियार कह दू गलती से तो तेरा एक धार देना
मेरी मलेरिया से घ्रस्त चुटकुलों पर ठहाके मार कर है देना
मेरे नए दोस्तों से तेरा जलना
तेरे आगे हर नकलियत का कम पड़ना
तेरे लंच में भिंडी लाना और मेरा सब चट  कर जाना
गुप्षुप के चटकारे लगाना
जो कोई बोले मेरे खिलाफ तो तेरा उम्र की फटकार लगाना
फ़ोन देर से उठाने पर तेरी मीठी गालियां
गालों पर छपी तेरी उंगलियों की लालियाँ
मेरा टूटकर बिखरना
तेरा मुझे समेटना
मेरा बच्चो सा दिलगी करना
तेरा सियानो सा मुझे समझना
ये सब झूठे व्यादे करते है
खाली बातो के दावे करते है
तूने मुझे चाशनी सी तार में नहीं तोला
जो भी था ,जैसा भी था मुँह पर बोला
तेरी बस के आगे किसी का बस नहीं चलता
ये तो सच है की ढूंढने पर भी नहीं मिलता
सिखलाया है मुझे दोस्ती का दस्तूर निभाना
तेरी वजह के आगे हर वजह का कम पड़ जाना
तेरी मेरी यारी ,सारी दुनिया महज़ अफसाना





Monday, February 5, 2018

Pachta Raha Hu

परिन्दो सा मै आलिशान महलो से टकरा रहा हु
लापता है मंज़िल ,लापता हु मै भी
फिर भी कदमो के पीछे चलता जा रहा हु
खाने को नहीं है निवाला ,बस धक्के और ठोकरे खा रहा हु
पीछे जिन्हे छोड़ आया हु ,अतीत समझकर
आज उस फैसले पर पछता रहा हु
हर रोज़ नयी मौत मरता जा रहा हु
नज़रें बिछाई बैठी है वो मेरी राह में
उसके इम्तेहान बड़ा रहा हु
हाल पूछे कोई तो यूँही
सब ठीक है कहकर टाले जा रहा हु
पर माँ का फ़ोन आते ही
भीगी आँखों के संग मुस्कुरा रहा हु


Tuesday, January 30, 2018

Kiske Pass Hai?

बंध तिजोरी है वो
ताला किसके पास है ?
ज़बान पर  ताले लगे है
चाभी किसके पास है ?
चाभियाँ गुच्छों में टंगी  है
पर  हिम्मत किसके पास है ?
 चीखती चिल्लाती है ख़ामोशी
सुनने वाले कान  किसके  पास है ?
मशरूफ है अश्क़ बहाने में
सहलाने वाले हाथ किसके पास है ?
बिखर गए टुकड़ा -टुकड़ा
समेटने वाले दोस्त किसके पास है ?
नींदे गवार कर उक्त चुके है
पड़नेवाली ऑंखें किसके पास है ?
हर मर्ज़ की है जो दवा
वो मुस्कराहट किसके पास है ?
जो हर हालत में दे रही है सबूत अपने होने का
वो मोहब्बत किसके पास है ?

Monday, January 29, 2018

Tabah Kar Mujhe Aise....

तबाह कर मुझे ऐसे
की कायनात को तबाह कर सकूँ
दुआ कर तो कर ऐसे
की तमाम हसरते पूरी कर सकूँ
इश्क़ कर तो कर ऐसे
तुझ में टूटकर बिखर सकूँ
चाहत कर तो कर ऐसे
की दुनिया की चाहत को चाहत को मिटा सकूँ
नफरत कर तो कर ऐसे
की तेरे लिए अजनबी बन सकूँ
और वफ़ा कर तो कर ऐसे
की मिसाल दे सकूँ


Sunday, January 28, 2018

Tum Kese

तुम कैसे यूँ बेशर्मो की तरह इज़हार किया करते हो
काश मैंने भी ऐसा हे किया होता
ज़्यादा से ज़्यादा क्या होता
वो ना ही करता,
बस ये ना सुनना हे असहनीय  था मुझे

तुम कैसे यूँ मुझसे लड़ते-झगड़ते हो
अपना समझकर
काश मैंने भी यूँ तकरार की होती
ज़्यादा से ज़्यादा क्या होता
वो मुझे नज़रअंदाज़ हे करता
बस ये नज़रअंदाज़गी का अंदाज़ हे नहीं भाता था मुझे

तुम कैसे मुझसे शिकायत करते हो
काश मैंने भी शिकवे किये होते
ज़्यादा से ज़्यादा वो धुत्कार ही देता
बस ये धुत्कार हे स्वीकार नहीं थी मुझे

तुम कितनी कठोरता से मुझे मेरी खामियां गिनवाते हो
काश मैंने भी जुर्रत कर उसे आइना दिखाया होता
ज़्यादा से ज़्यादा वो चुप हो जाता
बस यह चुप्पी ही तो खलती थी मुझे

तुम कैसे यूँ जताते हो मुझे
काश मैंने भी तुम्हे जताया होता
ज़्यादा से ज़्यादा वो नाराज़ हे होता
बस ये नाराज़गी हे मंज़ूर नहीं थी मुझे

 तुम कैसे यूँ मुझपर हक़ दिखाते  हो
काश मैंने भी यूँ हक़ दिखाया होता
ज़्यादा से ज़्यादा वो सवाल हे करता
बस ये सवाल हे लाजवाब करते मुझे

तुम कैसे यूँ मानकर बैठे हो की मै तम्हारी हे हूँ
काश मैंने भी यह ठाना होता
ज़्यादा से ज़्यादा वो दूर हे चला जाता
बस उससे दूर रहना हे बर्दाश्त नहीं था मुझे