Saturday, July 25, 2026

Hanuman

 कपीस केसरी नंदन, जातुधान दल भंजन,

संकट मोचन संकर सुवन, करुनानिधान रंजन।


बाल्यकाल में रवि को जो फल समझ उठा लेते,

वज्र प्रहार सहकर भी अमर मारुति कहलाते।


चरणों में प्रभु राम के बस ध्यान लगाते हैं,

पंचमुखी रूप धर के पाताल से ले आते हैं।


सब कांडों में श्रेष्ठ निराला सुंदरकांड है,

लंका की उस सभा में गूंजा जयजयकार है।


सूक्ष्म रूप धर माता के सम्मुख जब आते हैं,

उनकी शरण में आकर सब सुख मिल जाते हैं।


गरुड़ से भी बढ़कर के जिनकी गति अपार है,

महावीर महाबली वो जग के सिरताज हैं।


इष्ट जिनके तुलसी के प्राणों के आधार हैं,

जिनकी छत्रछाया में अनाथ नाथ पाते हैं।


भला आकाश कभी अपनी असीमता को नाँप पाया है,

अथाह इस सागर ने भी क्या छोर कभी पाया है।


जैसे पीपल की होती कोई शीतल छाँव घनी है,

वैसे ही हनुमान में नम्रता की मूरत सजी है।


भक्ति की महिमा क्या कहें, सीने में छवि महान है,

सिंदूरी चोले में सजे, वो मेरे वीर हनुमान हैं।

No comments:

Post a Comment