Saturday, June 27, 2026

Hanuman Stuti

 हनन कर मान का हनुमान पाया है 

खोल दो दरबार तुम्हरा दास आया है।  


सफल सगल पूरन करते कारज तुम हनुमान 

निश्चय प्रेम प्रतीति विनय करे सनमान।  

तुम्हरे कारण ही राम का नाम पाया है...


लक्ष्मण के हूँ प्राण के दाता राम ने सीने से लगाया है 

धु -धु दहन हो गयी लंका ,लंकेस्वर घभरया है।  

संकट मोचन के होने से संकट कंप -कंपापया है 


जड़बुद्धि को बल बुद्धि को पल तुम बदलते हो 

विपता में हो भक्त तुम्हारे अतिविलम्ब ना करते हो 

तुमको पाने को दासी ने गीत गाया  है। ..



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