Sunday, January 31, 2021

Kisan

 मैंने हसीन मंज़र  देखा

हल जोतते हाथों  में  ख़ंज़र देखा


ये इश्क है की उन्हें खुद के लिए लड़ते देखा

निहत्थी सरकारो को डरते देखा

मैंने हसीन मंज़र देखा 


आखिर वक्त है इंसानियत का मैंने दया को मरते देखा 

चिंगारी को आग में बदलते देखा 

मैंने हसीन मंज़र देखा


बेशर्मी से जो हो रहा है उसे होते हुए देखा 

आराम छोड़कर सड़को पर सोते देखा

मैंने हसीन मंज़र देखा

Sunday, January 24, 2021

Nazm

 आज़ादी की खातिर 

हुक्म टालना पड़ता है 

 

कल मनमरज़ी करने के लिए 

आज मन को मारना पड़ता है 


बाज़ी इश्क की जीत 

के हर बार हारना पड़ता है 


खुद का खुद में कुछ ना रहे कुछ 

खुद को उसपर वारना पड़ता है 


Saturday, January 16, 2021

Nazm

 पत्थर है वो 

आदत है  मेरी बहने की 


दिल ही काफी है 

ओकात नहीं महलों में रहने की


निकाह कर बैठा हुं तेरी रूह से 

हिम्मत नहीं है कहने की


बेहद हो गए हैं सितम उसके

मेरी भी ज़िद्द है सह

Sunday, December 27, 2020

नज़्म

 दुर रहो इश्क से ये एक बुरी बला है 

 टालते-टालते रह गया पर ये सवाल कहाँ चला है 


सुख गए लफ्ज़ मेरे 

खुश्क गला है 


चाँदनी में धुली  है  वो 

सूरज से  उबटन मला  है 


मुद्दत से कैद है 

ये वक़्त का आँसु कहाँ ढला है 


अब भी  है  वक़्त की रूक कर सजदे  कर लो

तेरे कुचे से वफ़ा का जनाज़ा चला है 


बेकदरो पर क्यो है इलज़ाम 

जनाब दिल तोड़ना भी एक कला है 




 








Saturday, December 12, 2020

Nazm

 सफ़र बेसब्री का कटेगा नहीं 

अब दर्द मुझसे  बांटेगा नहीं 


मुद्दत हो गई  राह तकते 

नज़रों का खालीपन छंटेगा नहीं


सहरा पर है नाम लिखा

मुकर्रर है वो मिटेगा नहीं 


अड़ियल है जो दिल से 

यु हटेगा नहीं 


ये भी सच है कि खिलाफ़ हमारे 

वो डटेगा नहीं 


इज़्ज़तो का पैमाना है 

अब घटेगा   नही 


बचा लो दामन इस रोग 

से कोई बचेगा नहीं 


तोहमते कसेगे ज़माने वाले 

तु साथ मेरे जचेगा नहीं 


Saturday, November 21, 2020

Kya Misal Doon

 जो खुद में मिसाल है, उसकी कया मिसाल दु 

मकान मालिक है वो मेरे दिल का,किराएदार समझ कैसे निकाल दु 

हैसियत है उसकी,  कोई एरा-गैर नहीं जो धितकार दु

तिल-तिल कर तड़प है अब कया हिसाब दु 

बनती-बनती बात बनी है, बात कैसे बिगाड़ दु 

साया उसका करता है राखी,  खुद को कैसे संभाल लु

राम मिलाई जोबड़ी है ये, वो विस्फोटक है ओर मै बवाल हु


Saturday, October 10, 2020

Gali thi Mere Yaar Ki

बात थी वो किसी इतवार  कि 

दिखी थी जब मुझे पहली बार थी 

पहली पौड़ी थी वो प्यार  की 

वो गली थी मेरे यार की 


किसी रोज़ जब नज़रे टकराई थी 

शर्म से लाल था मैं, मेरी शामत आई थी 

ढिबबे में जो हलवा  लाई  थी 

बात थी ये पहले इजहार की

वो गली थी मेरे यार की 


चंद कदमो से शुरू हुई थी 

ये कहानी जो हमने पिरोइ थी 

याद है कब हसी थी वो कब रोईं थीं 

आज भी तरसी है वो कमीज़ तेरे दि दार की

वो गली थी मेरे यार की 


हक समझकर जब अंजान  ने रखा था हाथ

तिलमिला उठा मैं दिखा दी थी उसे औकात 

गजब सी हिम्मत थी मुझ में जब वो होती थी मेरे साथ 

गले लगाकर करती शुक्रिया थी 

वो गली थी मेरे यार की 


उठने लगी उँगलीया ,बरसने लगे  सवाल 

क्या बताऊँ कैसा मचा था बवाल 

अःच नहीं आने दी उसने बनकर मेरी ढाल 

अपने प्रेम पर कायम  वो बरकरार थी 

वो गली थी मेरे यार की