Thursday, November 1, 2018

Garbage Bin

The garbage bin
In the street
Cornered and forever stinking
Uplifting a rotten community
The dogs come sniffin,patrollin
Cats wait in
In place,for an easy prey
Perfectly hiding
But the most interesting member of this society
Rats!,dirty,disgusting
Rats! scurrying and scanting
So many rats scrowling in deep
Reaching for the gold in ditch
They all appear the same,
One could go insane
While counting
Some were conceived
Some are breeding
They keep the bin's in check
One day,someone might empty it

What will happen to this tinking community?
Residing,under covered,
Away from the human reach
Breeding in the cornered street
I Wonder


Saturday, September 8, 2018

Aao Milkar Deep Jalaye

आओ मिलकर दीप जलाये
षंडयंत्री आभाओं को मिटाए
डर को हिम्मत से डराए
आओ मिलकर दीप  जलाये
साम दाम दंड भेद को हटाए
मेहनत और जुनूनीयत के हथकंडे अपनाये
आओ मिलकर दीप जलाये
विवादों के चक्रायु में घिरे सभी है
भेद कर नकरात्मक विचारो को विजय का बिगुल बजाये
आओ मिलकर दीप जलाये
प्रभाव से बैर यूँही बड़ते जा रहे है
पी कर मधुशाला का प्याला एकता की होली मनाये
आओ मिलकर दीप जलाये

Tuesday, July 24, 2018

Hadh se Guzar Gaye

मेरे मथे तूने अपने गुनाह कर दिए
नशे में तो जहाँ है सारा
पाँव क्या लडखडाये मेरे
तूने अपने इरादे  बदल दिए
तू होश में होकर मधहोश रहता है
बस मेरे लक्षण कुछ ऐसे थे जो छुप ना सके
कमाल है तेरी वफ़ा का इंतज़ार किया मैंने
और तुम दुसरो की राह पर दिए
आदत थी मुझे धोखो की
आह मेरी निकली तब तूने ज़ख्म हरे कर दिए
तुम नापते रहे हद मेरी
और एक हम थे पागल जो हद से गुज़र से गए

Friday, July 6, 2018

Aa Toh Zara

उक्त चूका हूँ मसरूफ होकर
तू एक बार बुला  तो ज़रा
थक गया हूँ किनारे नाप कर
तू मुझे डूबा तो ज़रा
भुझे हुआ चिराग हूँ एक मुद्दत से
एक बारी चिंगारी भड़का तो ज़रा
राहते बनकर तेरे सुर्ख ज़ख्मो को सेहलाऊँगा
तू करीब आ तो ज़रा
कफ़न बांधे   बैठा हूँ कब से
बस तू मुस्कुरा तो ज़रा
कर लूंगा गरूर खुद पे
तू नज़रे मिला तो ज़रा
बहा दूंगा सियाही तेरा ज़िक्र गढ़कर
तू दूर जा तो ज़रा
हद में इस कदर गुज़र जाऊँगा
तू मझे आज़मा तो ज़रा

Tuesday, July 3, 2018

Nazm

बादलो के सफर पर निकले थे हम
पर्वतो से टकरा गए
आफतों की आदते थी हमेशा से हे
चमकती रौशनी देखकर गभरा गए
रात खटमल सी काट कर लहू चुस्ती है मेरा
घिसा जब पथरो पर खुद को तो ज़ख्म नरमा गए 

Monday, June 4, 2018

Ab Bhi Baaki Hai

एक बड़े से घर में
कोने की तलाश है
खो चूका हु
फिर भी तुम्हे पाने की आस अब भी बाकी है

समुन्दर सा भरा हु मै
फिर भी तुझे छूने की प्यास अब भी बाकी है

कट के गिर गयी है जुबां
पर तेरे लफ्ज़ का स्वाद अब भी बाकी है

ठंडी पर चुकी है राख
पर तुझ में जलने की आग अब भी बाकी है



Saturday, April 14, 2018

Mard

बेहयाई से नापते है वो
पैमाना मेरी हया का
ज़रूरी वो मर्द जात के होंगे
बेइज़्ज़त कर परखते है वो
मेरी इज़्ज़त का तकाज़ा
ज़रूर वो  मर्द जात के होंगे
बतमीजी से अंदाज़ा लगाते है वो
मेरी तमीज़ का
ज़रूर  मर्द जात के होंगे
आवाज़ दबाकर पूछते है वो
की चुप क्यों हो
ज़रूर  मर्द जात के होंगे
जुबां काटकर कहते है वो
की बेज़ुबान क्यों हो
ज़रूर वो  मर्द जात के होंगे
जुर्रत नहीं किसी में उन्हें रोकने की
ज़रूर वो  मर्द जात के होंगे