Friday, February 28, 2020

Teri Gali Mein

उसकी धमकी से क्या मै डर जाऊँगा
हुस्न की चुनौती को कैसे ठुकराऊँगा
विश्वास है इतना की खाली हाथ नहीं आऊँगा
ज़िद्दी है तू ,अड़ियल हूँ मै भी,
होली तेरी गली में ही  मनाऊँगा

गर ना मिली चप्पल नंगे पांव दौड़ा आऊँगा
गुलाली रंग के तुझे बेशक पूरा भीग जाऊँगा
तेरी गालियों भी लगती है बरकत जैसी
अब और क्या मैं चाहूँगा
ज़िद्दी है तू ,अड़ियल हूँ मै भी,
होली तेरी गली में ही  मनाऊँगा

ज़माने की पाबंदियों को तोडा चला आऊँगा
सजदे तेरे दर पर हे सजाऊँगा
रूह में तेरी यु घुल जाऊँगा
ज़िद्दी है तू ,अड़ियल हूँ मै भी,
होली तेरी गली में ही  मनाऊँगा 

Monday, January 20, 2020

Kon Si Pehli Baar Hai

ये वक़्त की पुकार है
तीखी कलम की धार है
अलफ़ाज़ मेरे बेक़रार है
कौन सी पहली बार है ,

ताज -ओ- तख़्त हिलने लगे है
गुलशन दरख़्त पर खिलने लगे है
चुपके से दिल मिलने लगे है
पहचान पे सवाल है
नाम पर विवाद है
पर ये कौन सी पहली बार है

वाणी से विरोध है
गीता -आयतो का प्रतिशोध है
सत्य में मिला शोध है
अस्मिता पर प्रहार है
ये केसा अत्याचार है
पर ये कौन सी पहली बार है

Saturday, November 23, 2019

Wo Kahan Hai

वो कहाँ है जो मुझे अपना अज़ीज़ बताती थी 
वो कहाँ है जो  मुझसे कुछ नहीं छुपाती थी 
हर हाल में जो मेरे साथ खडी थी 
हिम्मत बनकर मेरे जूनून के लये लड़ी थी 
उन रास्तो को मैं पीछे छोड़ आया हूँ 
फ़रेबियो से मै मुँह मोड़ आया हूँ 
अब जो वो मुझसे रूठ गयी है 
खींचती हुई से ये दूर टूट गयी ही 
कैद है वो मेरे ज़ेहन में ,हर पल में 
वो आज में है मेरे कल में 
गैरो के रिश्तो में खुद को खोया करता हूँ 
तुम्हे क्या मालूम मै किस कदर रोया करता हूँ 
कभी किया था हालातो को मजबूर हमने ,आज खुद हालातो के आगे मजबूर है 
किसी है ये कश्मकश की पास होकर भी कितने दूर है 
तुम नहीं हो ! नहीं हो ! ये आइना मुझे कहता है 
पर इस बच्चे से दिल का क्या करू जो तेरी धुन में रहता है 
मेरे सब्र के बांध टूटने लगे है 
लौट आओ तुम की नामकीनियत के झरने फूटने लगे है 

Monday, October 21, 2019

Ek Mulakaat Ghum se

एक वो कोने में मुँह लटकाये बैठे है
और एक वो है जो शिकवे में ैथे है
चारो कोने चित है ,हिम्मत भी यु हारी है
अब जो जीते है तो इनाम में क्या पाएंगे
मझे बदनसीब से ना जाने क्या -क्या छीन ले जायेंगे
हमनवा जो बेवफा ,साथी भी साथ छोड़ गए है
अकेला हु मै ,ग़म मझे झिंझोड़ गए है
अब छुपी साधे ज़ख्मो को सी रहा हु
नामकीनियत के घूँट पी रहा हु
तम्हे क्या मालूम किस कदर जी रहा हु

Friday, October 4, 2019

Hasya Kavita Anghutha

नेताजी जैसे हे मंच पर विराजे
कानो में पड़ी फुसफुसाहट की आवाज़े
नेता पाखंडी है ,झूठ का पुलिंदा है
इसलिए तो राजनीती में ज़िंदा है
तन का चाहे गोरा
मन मगर काला है
देखो तो पेट मानो गेहूं का बोरा है

ये सुनकर नेताजी का हिल गया जिया
भाषण यही से शुरू किया
आपकी एक भी बात ठीक नहीं है
ये तोंद तो राष्ट्रीय एकता की प्रतिक है
चीनी ,यूरिया या चारा जो कुछ भी खाते है
सब यहीं  तो पचाते है
जब विदेशो में बनकर जाते है राजा
इस तोंद का घेरा नापकर लगाया जाता है
देश की  सेहत का अंदाज़ा
और कौन कहा हम झूठे है
हमारी सच्चाई के तो किस्से अनूठे है
ज़रा करो तो याद
पिछले आकाल के बाद
क्या जनता के दर्द को हम ने अपना मान कर नहीं सहा था
क्या  ये नहीं कहा था
जो कुछ भी रुखा-सूखा है सब तम्हारा हे तो है भाई
क्यूंकि हम तो केवल खाते है मखन और मलाई
तभी ऑटोग्राफ बुक हाथ में लिए
मंच पर चढ़ आया बालक एक
और  नेताजी ने दीया अंगूठा टेक
ये देखकर लोग हसे
नेताजी को लगा अब तो फसे
मन हे मन दी किस्मत को गाली
भाषण में यूँ बात संभाली
देखकर अंगूठा छाप ऑटोग्राफ
आप थोड़े हे करेंगे हमको माफ़
कहेंगे नहीं तो सोचेंगे ज़रूर
धित्कार है (३)
शिक्षा मंत्री अनपढ़ गवार है
तो सुनो हम अनपढ़ नहीं है
आठवीं की छमाही परीक्षा दिए है
यानी की आधे से ज्यादा बी ऐ है
विश्वास कीजिये हम भी आपके हे सरीखे है
पूरा गिरधारी लाल लिखना सीखे है
हम तो फिर भी अपना काम निकालते है
दूसरे मंत्रियो के अंघूठे भी उनके सेक्रेटरी संभालते है
हम तो सिर्फ आपको अपना अंगूठा दिखाते है
कई लोग तो आपको उंगलियों पर नचाते है
  आप क्यों हमे बेगाना मानने पर अड़े है
अब एहि देख लीजिये आप आराम से बैठे है और हम कितनी देर से खड़े है
एक श्रोता बोला  -
आप सच मुच में महान है थोड़ा और महान हो जायेय
इंसान से उठकर भगवन हो जाएए
कृपा कर अंतर्ध्यान हो जाएये





Wednesday, October 2, 2019

Mat Nikalana Ghar se

मत निकलना घर से की बाहर पहरा है
फासले रहे यूँही इसलिए यहाँ अँधेरा है
फसा लेगा वो,वो नज़रें नहीं सपेरा है

बस्ता था जिस बस्ती में कभी अब कोई और रह रहा है
गुनाह से रंग कर खुद को मुझे बेवफा कह रहा है
एक मुद्दत से रुका था वो ,देखो कैसे बेसब्र से बह रहा है
डूब ना जाना इस सागर में की ये राज़ गहरा है

Saturday, September 14, 2019

Duniya

 सौदा मुनाफा का हो तो नाज़ करती है ये दुनिया
क्या कहूं कितना परेशां करती है ये दुनिया

तोड़ दी गुलुक
तोड़ दिया दिल  भी
हद है की अश्क़ो का सौदा करती है ये दुनिया

मेरा वजूद कोई मुकर्रर  तो नहीं इस हुजूम में
फिर भो बदनाम करती है ये दुनिया

एक वो गया है नींदे हराम कर के
दूजा जीना हराम करती है  दुनिया