Tuesday, September 23, 2025

Laghu Ramayana

 

दशरथ के घर चार सुत आए,

राम, लखन, भरत, शत्रुघ्न नाम कहलाए।


तारका को मार गिराया,

तोड़ पिनाकी, जानकी को ब्याहा।


कैकेयी ने मन में विष घोला,

दशरथ के वचन को पूरा किया।

भरत को राज-पाठ दिलाया,

राम ने १४ वर्ष का वनवास पाया।


लखन और जानकी संग में,

राम चले अब उपवन में।


आई शूर्पणखा भेस बदल कर,

गई नाक कटी, रोती रावण के दर पर।


दशानन ने रौद्र रूप दिखाया,

हरण कर सिया को लंका ले आया।


हनुमंत ने भेंट कराई,

सुग्रीव को राजगद्दी दिलाई।


लंका दहन कर बजरंगी आए,

सीता माँ का विरह सुनाए।


सागर में नल-नील ने रास्ता बनाया,

राम नाम से पत्थर भी तैरकर आया।


कुंभकरण-मेघनाद को संहारा,

अंत में लंकेश्वर को ललकारा।


नाभि में जब बाण चलाया,

घर के भेदी ने लंका को ढहाया।


रावण का अंत करके प्रभु राम आए,

अयोध्या में फिर से खुशियाँ लाए।

सत्य की विजय हुई, धर्म फिर स्थापित हुआ,

राम राज्य का ऐसा महात्म्य है, जो हर युग में गाया जाता रहा।


Thursday, September 18, 2025

Shabadon ka Shilpkaar

बुलाया गया है उस शब्दों के शिल्पकार को,

जो तराशता  है रूप, भाव निराकार को।


थाली सजाई उसने दीपों, चंदन, और पुष्पों में भी नमी रही 

फिर भी रूठे रहे देवता, ना जाने क्या कमी रही।


वर्णों से लदी थी वैजयंती माला,

ध्वनि के खड़ताल को खरताला।


मौन को पीस-पीस कर विचारों का तिलक बनाया,

कल्पना की बांधनी से ओढ़नी को रंगाया।


अनुप्रास में आभास मिश्रित कर आभूषण विभूषित हुए,

रूपक के श्रृंगार से देवता और सुशोभित हुए।


यमक, श्लेषा, वीप्सा, अतिशयोक्ति व उपमा के  पंचामृत से अभिषेक हुआ,

मंद-मंद मुस्कुराए कान्हा, कहीं प्रसन्न महेश हुआ।


ये शब्द वंश के हरकारे,

साहित्य की संतान हैं

इनकी लेखनी के व्याल, विष-अमृत हुंकारे,

भाषा का अभिमान हैं।


इनके चिंतन के कलश में अखिल ज्ञान समाया है 

इनकी वाणी से विवश हो ईश्वर स्वयं भू उतर आया है।  


मन की गति पर सवार पार रवि के वो जा सकते हैं,

जो अविस्मरणीय है, उसे सरल कर सामने तुम्हारे ला सकते हैं।


अंतर में एक कुटुंब बसाकर अपने में ही रहते हैं,

शायद इसी कारण लोग उन्हें पागल-पागल कहते हैं।


प्रतिबिंब है ये सत्य का, समक्ष इनके सब चमकता है,

विधाता के छैनी-हथौड़े से गढ़े, कोई विरला ही कवि बन सकता है।


जीवित रहकर सृष्टि के कानन में अदृश्य होते जाते है, 

विख्यात होते हैं जब निर्जीव  खंडहर बन ये  जाते हैं।